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April 16, 2021
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देश विशेष

RAILWAY-RPF-डीजी क्रोनोलाजी – देश में सबसे मंहगे आइपीएस बने अरुण कुमार, केंद्र ने डीए और टीए पर लगाई रोक, फिर भी किए अफसर और जवानों के ट्रांसफर, अब सवालों के घेरे में दो साल की कार्यप्रणाली

एक साल में 8 हजार से ज्यादा जवानों के हुए ट्रांसफर, रेलवे को चुकाना पड़ा टीए

सेन्ट्रल डेस्क, नई दिल्ली।। देश के सबसे ज्यादा महंगे RPF DG अरुण कुमार साबित हुए हैं। केंद्र सरकार ने अर्थ व्यवस्था को सुधारने के लिए डीए और टीए पर रोक लगाई थी। इसके बावजूद रेलवे सुरक्षा बल में एक साल के दौरान हजारों की संख्या में जवानों और राजपत्रित अफसरों के ट्रांसफर हुए हैं। जिसकी वजह से रेलवे को टीए ( ट्रैवल एलाउंस ) के तौर पर करोड़ों रुपए का भुगतान भी करना पड़ा रहा है।

इसका खुलासा भी रेलवे बोर्ड के फाइनेंस विभाग के अफसरों ने किया है। इधर, अफसरों का कहना है कि आरपीएफ में बीते 2 साल में बल की शक्ति और सुरक्षा से खिलवाड़ किया गया है। इसके लिए बकायदा डीजी अरुण कुमार ने नियमों की अनदेखी करते हुए लगातार आईजी, डीआइजी और सीनियर डीएससी के ट्रांसफर किए। जिसकी वजह से जोन की सुरक्षा के मानकों की जानकारी भी अफसर जीएम और रेलवे बोर्ड को नहीं पाए। यही नहीं पीसीएससी और सीएससी रैंक के अफसरों के ट्रांसफर-पोस्टिंग के नियमों में अवधि का ध्यान नहीं दिया जा रहा है। खासतौर पर बड़ौदा हाउस और रेल भवन में पदस्थ आरपीएफ के अफसरों की भी अब तानाशाही शुरू हो गई है। इसका खुलासा भी हाल ही में डीआइजी से आईजी प्रमोट होने वाले अफसर ने किया था। जिसके बाद केंद्रीय आयोग ने भी डीजी अरुण कुमार को हिदायत भी दी है। गौरतलब है कि पिछले कई सालों से अफसरों के खिलाफ विजिलेंस के झूठी शिकायत और फिर जांच के नाम पर चंदा वसूली की जा रही है। अब अफसरों ने भी आरपीएफ छोड़ने का फैसला कर लिया है। खास तौर पर डीआइजी स्तर के दर्जन भर अफसर अन्य विभागों में डेपुटेशन पर जाने की तैयारी कर रहे हैं।

ऐसे चला ट्रांसफर और पोस्टिंग का खेल

प्रणव कुमार – आईजी कोकण रेलवे से जगजीवन राम एकेडमी में उन्हें पदस्थ किया था। फिर एकेडमी से आइजी आरपीएसएफ रेलवे बोर्ड/दयाबस्ती भेजा गया। कुछ महीनों के आइजी प्रणव कुमार को दयाबस्ती से एनएफआर मालीगांव पदस्थ किया गया। सूत्रों का कहना है कि 6 महीने में 3 ट्रांसफर प्रवण कुमार की मर्जी के अनुसार डीजी आफिस के द्वारा किए गए हैं।

संजय किशोर – आईजीसंजय किशोर डीजी अरुण कुमार के काफी करीबी माने जाते हैं। इसका खुलासा भी लगातार तीन ट्रांसफर के बाद हुआ है। साल भर के आइजी क्राइम रेलवे बोर्ड से आइजी कंस्ट्रक्शन बनाया गया। फिर आइजी किशोर को कंस्ट्रक्शन से पीसीएससी एनएफआर बतौर पदस्थ किया। मजे की बात है कि एनएफआर ने फिर दिल्ली में आइजी आरपीएसएफ बनाया गया। रेलवे बोर्ड में पदस्थ ट्रैफिक मेंबर ने बताया कि नियम है कि आइजी को जोन में तीन तक पदस्थ रहना अनिवार्य है।

आफ दा रिकार्ड/ off the record

भूमिहार कनेक्शन से गृह मंत्री भी नाराज – रेलवे सुरक्षा बल में अफसरों के कई गुट हो गए हैं। जिसकी वजह से देश के गृह मंत्री भी डीजी अरुण कुमार की कार्यप्रणाली से नाराज है। उन्हें बीएसएफ, सीआइएसएफ और सीबीआइ में भी डीजी और डायरेक्टर की जिम्मेदारी नहीं दी गई। हालांकि एसीसी और यूपीएससी के पैनल में भी कभी आइपीएस अरुण कुमार का नाम ही नहीं दिया गया था।

चैयरमैन भी हरकत से मौन – 1985 बैच के आइपीएफ अरुण कुमार के कार्यकाल की जानकारी रेलवे बोर्ड के चैयरमैन तक पहुंची है। जिसके बाद उन्होंने भी आरपीएफ के जुड़े हुए मामलों पर मौन धारन किया है। क्योंकि नियमों की अनदेखी और फर्जीवाड़े की शिकायत भी रेलवे बोर्ड तक पहुंची है। हालांकि अब मामला रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल तक भी ट्रांसफर-पोस्टिंग के सिलसिले का पहुंचा है।

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