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April 15, 2021
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आरपीएफ में फिर मची भर्राशाही ! बेकाबू हुए डीजी कुमार, रेलवे बोर्ड के अफसर नाराज , अब रेल मंत्रालय जल्द कर सकता है तलब

नियमों के उल्लंघन के मामले में सबसे ज्यादा चर्चित हुए फर्जी काउंटर करने वाले आईपीएस, पहली बार यूपीएससी तक पहुंचा मामला, सवालों के घेरे में आरपीएफ के डायरेक्टर जनरल

नई दिल्ली।। रेल सुरक्षा बल में इन दिनों फिर भर्राशाही का आलम देखने को मिला है। आरपीएफ के डायरेक्टर जनरल पर कई संगीन आरोप लगना शुरू हो गए हैं। जिसके बाद रेलवे बोर्ड के अफसर भी नाराज हुए हैं। बताया जाता है कि अब रेल मंत्रालय उन्हें जल्द तलब कर सकता है। हालांकि गृह मंत्रालय से पीएम नरेंद्र मोदी नाराज हैं। जिसके चलते महिला आयोग और सीवीसी सुनवाई नहीं हो रही है लेकिन आगामी सप्ताह के बाद फिर एक बार रिव्यू बैठक होगी। जिसमें आरपीएफ के कई विवादित मामलों को गृह मंत्री के द्वारा सुनवाई में लाया जाएगा।

रेलवे की सुरक्षा के लिए यशो लभस्व अवश्य जरूरी है। जिसे बेकार और डी- रेल करने की कोशिश आईपीएस के द्वारा की गई है!


मंत्रालय से जुड़े हुए सूत्रों ने बताया कि आईपीएस अरुण कुमार के संबंध में कई शिकायतें प्राप्त हुई है। जिसे लेकर पूरा महकमा परेशान हो गया है। क्योंकि प्रमोशन के कई मामले में नियमों की अनदेखी भी की गई है। खास बात यह है कि जब देश पूरा कोरोना महामारी से लड़ रहा था तो डायरेक्टर जनरल रैंक के अफसर पोर्ट ब्लेयर में मस्ती कर रहे थे। जिसके बाद उन्हें अपना नए साल का जश्न प्लान चेंज करके दिल्ली वापस लौटना पड़ा था। अंडमान निकोबार से लौटने के बाद आरपीएफ में कई अफसरों की प्रमोशन हुए। जिसमें जूनियर को प्रमोशन देकर आईजी (आलोक कुमार) बनाया गया। यह मामला सबसे ज्यादा विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है। क्योंकि 3 जोन के आईजी भी अब नाराज हो गए हैं।बताया जाता है कि (पीसीएससी) आइजी अंबिका नाथ मिश्रा, कंचन चरण, संजय किशोर सहित कई आईजी रैंक के अफसर नाराज हो गए हैं। क्योंकि विभागीय गड़बड़ियों की वजह से अब उन्हें परेशान होना पड़ रहा है। खास बात यह है कि डीआइजी (सीएससी) रैंक के कई अफसरों में गुटबाजी शुरू हो गई है। इसके पीछे की वजह बताई जा रही है कि आरपीएफ में भर्रा शाही का दौर फिर से शुरू हो गया है।


फर्जी एनकाउंटर से लेकर बीएसएफ तक सिर्फ विवादों में रहे

  • सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के रिटायर्ड डीजी ने बताया कि आईपीएस अरुण कुमार बीएसएस में भी फर्जी शिकायत के आधार पर जवानों को चार्टशीट दिया करते थे और खुद ही जांच करके क्लीनचिट देते थे। फिर कई बार अधिकारियों ने सवाल भी उठाए थे। जिसके बाद विभाग में छवि खराब भी हुई थी। ठीक इसी तरीके से आरपीएफ में भी अफसरों की परेशानी बढ़ी हुई है। क्योंकि नियमों के उल्लंघन के मामले में अब उन्हें कोर्ट में पेश होना पड़ रहा है।
  • यूपी के अफसरों ने कहा फर्जी एनकाउंटर से चर्चित हुए थे आईपीएस
  • यूपी के अफसरों का कहना है कि आईपीएस अरुण कुमार सबसे ज्यादा सुर्खियों में एक फर्जी एनकाउंटर के मामले में सामने आए थे। जिसके बाद हाल ही में जी ग्रुप (zee 5) के द्वारा खुद ही फंड देकर फिल्म भी बनी हुई है। शुक्ला नाम के गैंगस्टर को एनकाउंटर का नाम देकर यूपी में सुर्खियां बटोरी थी लेकिन फिर सीबीआई पहुंचे। जिसके बाद तेलगी कांड, आरुषि-हेमराज मर्डर केस और निठारी हत्याकांड के मामले में जांच भी की लेकिन किसी भी अपराधी को सजा नहीं मिल सकी। क्योंकि कोई ठोस सबूत कोर्ट के सामने प्रस्तुत ही नहीं हो सके। तीनों चर्चित मामलों के इन्वेस्टिगेशन ऑफीसर बताया जाता है कि अरुण कुमार ही थे।

बदमाशी के मास्टरमाइंड साबित हुए

  • आईपीएस अरुण कुमार की कार्यशैली को देखते हुए बीते 2 साल में कई अफसरों ने सवाल उठाए हैं। खासतौर पर फोर्स के रिटायर्ड अफसरों का कहना है कि अरुण कुमार की बदमाशी का पैटर्न फर्जी एनकाउंटर से जुड़ा हुआ है। जिसे जांच के दायरे में कभी भी पीएमओ ने नहीं लिया है। जिसकी वजह से अब सीबीआई की रेस में अरुण कुमार दौड़ रहे हैं लेकिन एमपी कैडर के आईपीएस ऋषि कुमार शुक्ला जी नाराज है। क्योंकि सीबीआई जैसे अहम जांच एजेंसी का दुरुपयोग पहली बार देश में हुआ है। अब सीबीआई से जुड़े हुए सभी के मामलों की गृहमंत्री के द्वारा समीक्षा भी कराई जाएगी। क्योंकि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को सभी मामलों की जानकारी है।

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