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Madhya Pradesh
April 16, 2021

नई दिल्ली, सेंट्रल डेस्क ।। रेल सुरक्षा बल के डायरेक्टर जनरल ने बल को नीचा दिखाने के साथ अब प्रधानमंत्री के डिजीटल इंडिया मिशन को भी ठेंगा दिखाया है। रेलवे बोर्ड के आदेश के उल्लंघन करते हुए गोपनीय प्रकाशित किताब छपाई हुई है। जिसके लिए अब आइजी और डीआइजी से वसूली की जा रही है। मजे की बात है कि किताब छपाने वाले को भुगतान करने के लिए जबरन अफसरों पर डीजी कुमार ने दबाव बनाया है। हालांकि आइपीएस अरुण कुमार से रेलवे बोर्ड और रेल मंत्रालय भी परेशान है।

जानकारी के अनुसार 6 फरवरी को रेलवे बोर्ड के नाम पर ( क्राइम) सेक्शन से एक आदेश जारी किया गया है। जिसमें सभी आइजी रैंक, डिवीजन के कमांडेंट स्तर के अफसरों को किताब खरीदने के साथ-साथ (1-3) हजार रुपए भेजने के लिए रिमांडर भेजा गया है। बताया जाता हैं कि { आरपीएफ काफी-टेबल बुक } के लिए चंदा वसूलने की कवायद चल रही है। खास बात है कि आरपीएफ के डीजी के क्राइम पैटर्न को लेकर किताब लिखी गई है। जिसमें आरपीएफ के डीजी कार्यकाल से जुड़ी सभी सभी करतूतों का जिक्र भी है। हालांकि आरपीएफ की छवि को विभागीय स्तर पर खराब करने की वजह आइपीएस रैंक के अफसर बताए जाते हैं। 1985 बैच के सबसे चर्चित अरुण कुमार हैं। जिन्होंने आरपीएफ में अपने बीते 2 सालों में बिहार को प्रमोशन और पोस्टिंग देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। रेलवे बोर्ड , आरपीएफ और डायरेक्टिव-32 के नियमों का उल्लंघन गृह मंत्रालय शय पर किया गया । जिसका नतीजा भी सामने निकलकर आया है कि आरपीएफ के अफसरों के खिलाफ फर्जी शिकायत के आधार चार्जशीट डीजी कुमार ने थमाई और फिर जूनियर को प्रमोशन दिया। हालांकि अब रेलवे बोर्ड भी डीजी की करतूतों से बेचैन हो गया है लेकिन कार्रवाई का अधिकार रेलवे और मंत्रालय के पास नहीं है। क्योंकि आइपीएस अरुण कुमार पर गृह मंत्रालय का शह है।

पीएम ने किया इंकार, फिर भी हुई छपाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजीटल इंडिया को बढ़ावा देने के लिए कागज और स्टेनरी की छपाई पर रोक लगाई थी। रेलवे ने भी ई-आफिस शुरू कर दिया लेकिन फिर भी किताब की छपाई हुई है। हालांकि अब मामला पब्लिशर के भुगतान से जुड़ा हुआ है।

रेलवे बोर्ड भी रियल मैंगो से हैरान  – रेलवे के अफसरों ने बताया कि कोरोना काल में आरपीएफ के डीजी ने रियल मैंगो पर एक आधे घंटे की विवेचना बताई थी। जिसमें उन्होंने बताया था कि रेलवे में अवैध रूप से टिकट बुकिंग करने वाले बंग्लादेश, दुबई सहित कई राज्यों के गिरोह शामिल है लेकिन तथ्य फालतू थे। इसलिए रेलवे बोर्ड के अफसरों ने भी अब आरपीएफ के डीजी से किनारा कर लिया है। सूत्रों ने बताया कि रियल मैंगो नाम के साफ्टवेटर के जरिए दलाल टिकट बुकिंग करते थे लेकिन 1985 बैच के सबसे काबिल अफसर आइपीएफ अरुण कुमार ने विदेश फंडिंग का भंडाभोर किया था। हालांकि कोई ठोस सबूत उपलब्ध कोर्ट के पास नहीं हो सके हैं।

कौन है 1955 बैच के दरभंगा के कुमार

उपराष्ट्रपति के मिशन से जुड़ी किताब – अफसरों ने बताया कि उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू ने 2018 में आरपीएफ में सुधार के लिए कई कदम उठाने के लिए सुझाव दिए थे। जिसमें आरपीएफ के जवानों के लिए योजना बनाई गई थी। जवानों को बैरक, ट्रेनिंग सेंटर जैसी सुविधाओं के लिए काम करने के लिए अमल किया जाना था।