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April 16, 2021
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EXCULSIVE ON NEW COALGHAT KAND ईस्टर्न रेलवे न्यू कोयला घाट कांड – रेलवे ने RPF आईजी से सुरक्षा के मामले में नहीं किया जवाब तलब, सवालों के घेरे में कार्यप्रणाली और 9 लोगों की मौत का जिम्मेदार कौन..

बिल्डिंग की सुरक्षा और सेफ्टी भी आरपीएफ की जिम्मेदारी, इसके बावजूद मानकों का नहीं हुआ पालन

सेंट्रल डेस्क।। ईस्टर्न रेलवे में हुए न्यू कोयलाघाट अग्निकांड को लेकर रेलवे ने सुरक्षा मानकों को लेकर कई एडवाइजरी जारी की है लेकिन इस कांड को लेकर आरपीएफ से सवाल जवाब नहीं हुए हैं। खास बात यह है कि सुरक्षा मानकों को लेकर आरपीएफ की जिम्मेदारी तय की गई है। इसके बावजूद ईस्टर्न रेलवे के आईजी अंबिका नाथ मिश्रा से कोई जवाब तलब करने की जहमत रेलवे बोर्ड ने भी नहीं उठाई है।

बताया जाता है कि कोयला घाट और न्यू कोयलाघाट दोनों ही बिल्डिंग की सुरक्षा और सेफ्टी की जिम्मेदारी आरपीएफ के पास होती है। इसे लेकर आईजी से लेकर सीनियर डीएससी लेवल के अफसर तक मानकों की पड़ताल और व्यवस्था करते हैं। मगर 9 लोगों की मौत को लेकर रेलवे बोर्ड ने भी जिम्मेदार अफसरों से सवाल करना उचित नहीं समझा है। इसके पीछे की वजह बताई जाती है कि ईस्टर्न रेलवे के आईजी ए एन मिश्रा सीधे डीजी तक संपर्क रखते हैं। इसलिए जीएम और अन्य अफसरों ने दी नोटिस और स्पष्टीकरण अग्निकांड के संबंध में नहीं मांगा है।

इसलिए उठे गंभीर सवाल

  • बताया जाता है कि न्यू कोयला घाट के पास 13 मंजिल बिल्डिंग में सुरक्षा मानकों से जुड़े हुए विषय को लेकर आईजी मिश्रा ने कभी चर्चा तक नहीं की।
  • इसके अलावा जवानों के मामलों पर भी आइजी ने कोई रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को अपने कार्यकाल के दौरान नहीं थी। पिछले कई जोन में काम करने के दौरान उन्होंने सिर्फ ट्रांसफर-पोस्टिंग मनमानी रवैये से करते रहे। जिसकी वजह से फोर्स में भी आक्रोश बना हुआ है।

ईस्टर्न रेलवे – आइजी के आते ही जवानों ने दिया था वीआरएस का आवेदन

  • रेलवे बोर्ड के अफसरों ने बताया कि एएन मिश्रा ईस्टर्न रेलवे के आईजी के तौर पर पदस्थ हुए थे। कुछ दिनों की कार्यप्रणाली से परेशान जवान हो गए थे। करीब 400 से ज्यादा जवानों ने वीआरएस लेने की इच्छा जताई थी। क्योंकि सिर्फ कोयला व्यापार और अवैध वंडरिंग रोकने के नाम पर चंदा वसूली का कार्यक्रम संचालित किया जा रहा था। पूरे ईस्टर्न रेलवे में लंबे समय से अवैध वेंडरिंग का कारोबार ए एन मिश्रा के संरक्षण में फलता फूलता रहा है। इसके बावजूद डीजी अरुण कुमार के द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई। जिसका नतीजा है कि लगातार फोर्स में अनियमितताएं सामने आई।

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